Vadh 2 Movie Review in Hindi: अगर आपने वध का पहला पार्ट देखा है तो बढ़िया, और नहीं भी देखा है तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि फर्स्ट पार्ट से इसका कोई लेना-देना नहीं है। तो वध 2 मूवी रिव्यू शुरू करते है
वध 2 एक स्पिरिचुअल सीक्वल है—बिल्कुल वैसे ही जैसे केसरी / केसरी 2, ओह माय गॉड / ओह माय गॉड 2, एक विलन / एक विलन रिटर्न्स।
तो हाल ही में मैंने थिएटर में वध 2 देखी, जिसमें लीड रोल में हैं नीना गुप्ता और संजय मिश्रा।
अब फटाफट बात करते हैं इस फिल्म के बारे में।
कहानी: मर्डर है, लेकिन सवाल बहुत हैं
पहले पार्ट की तरह यहां भी एक वध हुआ है।
लेकिन क्यों हुआ? किसने किया? किस वजह से किया?
पूरे फर्स्ट हाफ तक आपको कन्फ्यूज रखा जाता है।
कभी लगता है इसने मारा होगा, फिर लगता है नहीं—कोई और होगा।
यही कन्फ्यूजन बहुत अच्छे तरीके से बिल्ड किया गया है और यही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।
फिल्म भले ही आपको उलझाए, लेकिन साथ ही सीट से बांधकर भी रखती है।
एक्टिंग: हर किरदार पूरी तरह फिट
भले ही फिल्म के दो मेन किरदार हों—संजय मिश्रा और नीना गुप्ता—
लेकिन बाकी सभी एक्टर्स को भी लगभग बराबर स्क्रीन टाइम दिया गया है।

- कुमुद मिश्रा ने शानदार काम किया है
- शिल्पा शुक्ला असर छोड़ती हैं
- अमित सिंह एक इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के रूप में पूरे केस की परतें खोलते हैं
जैसे-जैसे इन्वेस्टिगेशन आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे सच्चाई सामने आती जाती है।
सस्पेंस, ट्विस्ट और शॉक मोमेंट्स
कुछ चीज़ें थोड़ी प्रिडिक्टेबल हैं, लेकिन फिल्म में बीच-बीच में ऐसे शॉक मोमेंट्स डाले गए हैं जो आपको फिर से हुक कर लेते हैं।
पूरी मूवी का टोन पहले पार्ट की तरह सस्पेंसफुल बना रहता है और लास्ट में 2–3 अच्छे ट्विस्ट सामने रखे जाते हैं।
पहले पार्ट में भी एक क्रिमिनल माइंडसेट वाले इंसान का वध होता है।
इस पार्ट में भी ऐसा ही एक बेहद क्रूर इंसान दिखाया गया है—
जिसकी झलक आपने ट्रेलर में देखी ही होगी, जहां वो छोटे-छोटे पप्पीज़ को गाड़ी के टायर के नीचे रख देता है।
जेल के अंदर मर्डर: सबसे दिलचस्प हिस्सा
फिल्म का लगभग 90% सेटअप जेल के अंदर का है।
वध भी जेल के अंदर ही होता है।
अब सवाल ये है कि:
- इतनी पुलिस प्रोटेक्शन के बावजूद मर्डर कैसे हुआ?
- लाश को ठिकाने कैसे लगाया गया?
- इन्वेस्टिगेशन कैसे आगे बढ़ती है?
ये सब देखने में वाकई मज़ा आता है।
बिना गानों की फिल्म, बिना ब्रेक के कहानी
पूरी फिल्म में एक भी गाना नहीं है जो स्टोरी को स्लो करे।
हां, आख़िर में एक गाना आता है, लेकिन मूवी खत्म होने के बाद—
और तब तक फिल्म अपना असर पूरी तरह छोड़ चुकी होती है।
मूवी की लंबाई करीब सवा दो घंटे है और सबसे अच्छी बात—
ये आपका टाइमपास नहीं करती।
राइटिंग और स्क्रीनप्ले: फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
फिल्म की राइटिंग बहुत सॉलिड है।
सीन्स की प्लेसिंग बहुत सोच-समझकर की गई है।
शुरुआत में दिखाया गया एक सीन, जिसका मतलब आपको लास्ट में जाकर समझ आता है।
हर एक चीज़ को धीरे-धीरे, सस्पेंस के साथ खोला गया है।
निगेटिव पॉइंट
बस एक कमी है—
नीना गुप्ता और संजय मिश्रा के रिश्ते को ठीक से बिल्ड नहीं किया गया।
क्यों वो एक-दूसरे की मदद करते हैं?
उनकी इतनी अच्छी अंडरस्टैंडिंग कैसे है?
क्योंकि इस पार्ट में वो दोनों असल में अजनबी हैं, इसलिए ये बात थोड़ी खटकती है।
वध 2 मूवी रिव्यू: फाइनल वर्डिक्ट
ओवरऑल, वध 2 एक वेल-मेड सस्पेंस थ्रिलर है।
मुझे पर्सनली ये फिल्म बहुत अच्छी लगी।
⭐ रेटिंग: 4/5 स्टार
आज भले ही थिएटर में इसे कम ऑडियंस मिले,
लेकिन ओटीटी पर ये फिल्म ज़रूर चलेगी। थिएटर रन के बाद ये Netflix पर आ ही जाएगी।
👉 अगर आपने फिल्म देख ली है, तो कमेंट में जरूर बताइए आपकी राय क्या है।
मिलते हैं अगले रिव्यू में।
